भारत-तालिबान मुलाकात: Pahalgam हमले के बीच कूटनीति की नई राह

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भारत-तालिबान मुलाकात: Pahalgam हमले के बीच कूटनीति की नई राह
भारत-तालिबान मुलाकात: Pahalgam हमले के बीच कूटनीति की नई राह

Publisher – Hindian Media
Date Published – April 28, 2025

Article Description:
भारतीय राजनयिकों ने तालिबान सरकार से मुलाकात की। यह लेख पहलगाम हमले के बीच इस मुलाकात के मुद्दों और कूटनीति के महत्व पर चर्चा करता है।


हेलो दोस्तों,
आज हम एक ऐसी खबर की बात करेंगे जो भारत की विदेश नीति और कूटनीति की ताकत को दिखाती है। हाल ही में भारतीय राजनयिकों ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब पहलगाम आतंकी हमले ने देश को हिलाकर रख दिया। आइए, इस मुलाकात के पीछे के कारण, इसके मुद्दों और भारत की कूटनीति को समझते हैं।

पहलगाम हमले के बीच मुलाकात क्यों?

पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत-पाक तनाव को और बढ़ा दिया, जैसा कि हमने **Asaduddin Owaisi ने Shahid Afridi को कहा ‘जोकर’: पहलगाम हमले पर गरमाई सियासत** में देखा। लेकिन इस बीच, भारत ने तालिबान सरकार के साथ बातचीत का रास्ता चुना। यह मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने सावधानी से अपने कदम उठाए हैं। इस मुलाकात में कई अहम मुद्दे उठे, जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और अफगानिस्तान में भारत के हित।

भारत ने तालिबान से साफ कहा कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए खतरा है। पहलगाम हमले के बाद भारत की यह चिंता और बढ़ गई कि क्षेत्र में आतंकी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसलिए, इस मुलाकात में भारत ने तालिबान से आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने की बात कही। इसके अलावा, अफगानिस्तान में भारत के पुराने प्रोजेक्ट्स, जैसे स्कूल और अस्पताल, को फिर से शुरू करने पर भी चर्चा हुई।

भारत की कूटनीति की ताकत

Image Source : FILE

यह मुलाकात भारत की कूटनीति की ताकत को दिखाती है। एक तरफ भारत पहलगाम हमले जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपना रहा है, जैसा कि **नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने पहलगाम हमले पर जताया गुस्सा: एकता की ताकत पर गर्व** में देखा गया। दूसरी तरफ, वह तालिबान जैसे जटिल पक्षों से बातचीत भी कर रहा है। यह दिखाता है कि भारत अपनी सुरक्षा और हितों को लेकर कितना सतर्क और समझदार है।

इस मुलाकात ने यह भी साफ किया कि भारत सिर्फ अपने पड़ोसियों के साथ ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता चाहता है। तालिबान के साथ बातचीत आसान नहीं थी, लेकिन भारत ने यह दिखाया कि वह मुश्किल हालात में भी संवाद का रास्ता चुन सकता है। यह मुलाकात भविष्य में और सहयोग का रास्ता खोल सकती है।

क्या होगा असर?

इस मुलाकात का असर सिर्फ भारत और तालिबान तक सीमित नहीं है। यह पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता पर असर डाल सकता है। अगर तालिबान आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाता है, तो यह भारत के लिए एक बड़ी जीत होगी। साथ ही, अफगानिस्तान में भारत के प्रोजेक्ट्स फिर से शुरू होने से वहां के लोगों को भी फायदा होगा। लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि तालिबान कितनी गंभीरता से इन मुद्दों को लेता है।

निष्कर्ष

भारत और तालिबान की यह मुलाकात एक नई शुरुआत हो सकती है। पहलगाम हमले जैसे मुश्किल वक्त में भारत ने दिखाया कि वह सख्ती और कूटनीति दोनों को साथ लेकर चल सकता है। यह मुलाकात हमें यह सिखाती है कि शांति और सुरक्षा के लिए संवाद कितना जरूरी है। आइए, हम सब मिलकर उम्मीद करें कि यह कदम क्षेत्र में शांति लाए।

आपके लिए सवाल:

  1. क्या भारत को तालिबान से बातचीत जारी रखनी चाहिए? अपनी राय बताएं।
  2. आतंकवाद के खिलाफ भारत और तालिबान कैसे मिलकर काम कर सकते हैं?
  3. क्या यह मुलाकात भारत की विदेश नीति की ताकत दिखाती है?

Based on an article from India TV, https://www.indiatv.in/india/national/amid-indo-pak-tensions-indian-diplomats-met-the-taliban-government-these-issues-were-discussed-2025-04-28-1131003, published on April 28, 2025.


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